सामाजिक जीवन परिचय :
बचपन से हर क्षेत्र में मेहनत के बलबूते अपने सपनो को साकार करने का प्रण, स्वतः ही अपने गांव में मेरी छवि सदैव दूसरों को प्रेरित करती रही। वर्ष 2004 में माध्यमिक शिक्षा में पूरे तहसील में प्रथम स्थान प्राप्त कर यह गरिमा मैंने बरकरार रखी।
बचपन से भगतसिंह की कहानी से प्रेरित होते हुए यह बात घर कर गई थी की "देश के प्रति कुछ करने के लिए उम्र नहीं नीयत मायने रखती है"। चूँकि परिवार में कबीर साहेब के सिद्धांतों का सर्वाधिक प्रभाव था। अतः मैंने पूज्य गुरुदेव श्री असंग देव जी से दीक्षा लेकर संत प्रदाय तथा देश को अपना जीवन सौंप दिया।
वर्ष 2009 में गुरुदेव के आदेशानुसार मुझे अपनी जन्मभूमि छत्तीसगढ़ के प्रति मेरी विशेष सद्भाव को देखते हुए पुनः सेवा का अवसर देते हुए आश्रम का सम्पूर्ण कार्यभार मुझे सौंपा गया।
विगत 14 वर्षों में मैंने आश्रम में ही 500 से अधिक गौवंश की सेवा प्रति उचित व्यवस्था की। अपने निवास स्थान से सम्बन्धित गावों के नियमित व्यवस्था तथा कल्याण के प्रति स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर आदर्शग्राम की रूपरेखा गढ़ी।
मैं भूमिदान, शिक्षादान, संकल्पदान, श्रमदान, नेत्रदान, रक्तदान तथा निःशुल्क चिकित्सा शिविर जैसे कार्यक्रमों के प्रति कार्यरत रहा।